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हमारे संस्थापक का संदेश

वरुणदीप की शुरुआत क्यों हुई, और हमसे जुड़ने वाले हर बच्चे से हमारा वादा।

श्री रवेन्द्र प्रकाश सक्सेना
श्री रवेन्द्र प्रकाश सक्सेनासंस्थापक, वरुणदीप मेमोरियल जूनियर हाई स्कूल

प्रिय अभिभावकों और विद्यार्थियों,

वरुणदीप का अर्थ है “वरुण का दीप।” इस विद्यालय की स्थापना 2006 में हमारे पुत्र वरुण की स्नेहमयी स्मृति में हुई। हमने उसे किसी स्मारक से नहीं, बल्कि एक विद्यालय से याद रखना चुना, एक ऐसा स्थान जहाँ दूसरे बच्चे वह सब बन सकें, जो बनने का अवसर उसे नहीं मिला।

एक छोटा-सा दीप, एक बार जल जाए, तो अपना प्रकाश खोए बिना अनगिनत दीप जला सकता है।

हमारे प्रतीक-चिह्न में बने दीये के पीछे यही विचार है। हमारे द्वार से गुज़रने वाला हर बच्चा उस प्रकाश का कुछ अंश आगे ले जाता है, और वरुण के लिए इससे बड़ा कोई स्मारक नहीं हो सकता।

पहले दिन से हमारा लक्ष्य सरल रहा है: हमारे क्षेत्र के हर बच्चे को ऐसा विद्यालय देना, जहाँ उसे नाम से जाना जाए। हमारी कक्षाएँ प्री-नर्सरी से कक्षा 8 तक हैं, इतनी छोटी कि शिक्षक तुरंत समझ लें कि किस बच्चे को मदद चाहिए, और घर के इतने पास कि अभिभावक हर क़दम पर अपने बच्चे की पढ़ाई का हिस्सा बन सकें।

हमारा मानना है कि अच्छी शिक्षा केवल अंकों के बारे में नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारे विद्यार्थी आनंद से पढ़ें, आत्मविश्वास से बोलें, बड़ों का और एक-दूसरे का सम्मान करें, और आगे आने वाली हर चुनौती के लिए तैयार होकर निकलें। अनुशासन, ईमानदारी और दया हमारे लिए किसी भी परीक्षा जितने ही महत्वपूर्ण हैं।

उन अभिभावकों से, जो हर सुबह अपने बच्चों को विश्वास के साथ हमें सौंपते हैं: धन्यवाद। यही विश्वास वह तेल है, जिससे यह दीप जलता रहता है। हमारे द्वार सदा खुले हैं। यदि आप कभी अपने बच्चे के बारे में बात करना चाहें, तो कृपया मुझसे अवश्य मिलें।

स्नेह और आशीर्वाद सहित,

रवेन्द्र प्रकाश सक्सेनासंस्थापक, वरुणदीप मेमोरियल जूनियर हाई स्कूल